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श्लोक 3.75.7  |
ऋष्यमूको गिरिर्यत्र नातिदूरे प्रकाशते।
यस्मिन् वसति धर्मात्मा सुग्रीवोंऽशुमत: सुत:॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| 'वहां से थोड़ी दूरी पर ऋष्यमूक पर्वत है, जिस पर सूर्यपुत्र पुण्यात्मा सुग्रीव निवास करते हैं। |
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| ‘At a short distance from there is the Rishyamuka mountain on which resides the virtuous Sugreeva, son of the Sun. |
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