श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 75: श्रीराम और लक्ष्मण की बातचीत तथा उन दोनों भाइयों का पम्पासरोवर के तट पर जाना  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  3.75.27-28 
सुग्रीवमभिगच्छ त्वं वानरेन्द्रं नरर्षभ॥ २७॥
इत्युवाच पुनर्वाक्यं लक्ष्मणं सत्यविक्रम:।
कथं मया विना सीतां शक्यं लक्ष्मण जीवितुम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस समय पराक्रमी श्री राम ने पुनः लक्ष्मण से कहा - 'पुरुषश्रेष्ठ लक्ष्मण! तुम वानरराज सुग्रीव के पास जाओ, सीता के बिना मैं कैसे जीवित रह सकता हूँ?' 27-28॥
 
At that time, the mighty Shri Ram again said to Lakshman - 'Lakshman, the best of men! You go to monkey king Sugriva, how can I survive without Sita? 27-28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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