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श्लोक 3.75.10-11  |
आश्रमात्तु ततस्तस्मान्निष्क्रम्य स विशाम्पति:॥ १०॥
आजगाम तत: पम्पां लक्ष्मणेन सह प्रभु:।
समीक्षमाण: पुष्पाढॺं सर्वतो विपुलद्रुमम्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् प्रजापालक भगवान् श्री राम लक्ष्मण के साथ उस आश्रम से निकलकर सर्वत्र पुष्पों से लदे हुए नाना प्रकार के वृक्षों की शोभा निहारते हुए पम्पा सरोवर के तट पर आये। 10-11॥ |
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| Thereafter, the people's guardian Lord Shri Ram came out of that ashram with Lakshman and came to the banks of Pampa lake, admiring the beauty of different types of trees laden with flowers everywhere. 10-11॥ |
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