श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 74: श्रीराम और लक्ष्मण का पम्पासरोवर के तट पर मतङ्गवन में शबरी के आश्रम पर जाना, शबरी का अपने शरीर की आहुति दे दिव्यधाम को प्रस्थान करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.74.4 
तौ पुष्करिण्या: पम्पायास्तीरमासाद्य पश्चिमम्।
अपश्यतां ततस्तत्र शबर्या रम्यमाश्रमम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पम्पा नदी के पश्चिमी तट पर पहुँचकर दोनों भाइयों ने वहाँ शबरी का सुन्दर आश्रम देखा।
 
Reaching the western bank of the river Pampa, the two brothers saw the beautiful hermitage of Shabari there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)