श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 72: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा चिता की आग में कबन्ध का दाह तथा उसका दिव्य रूप में प्रकट होकर उन्हें सग्रीव से मित्रता करने के लिये कहना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  3.72.25-26 
वानरांश्च महाकायान् प्रेषयिष्यति राघव॥ २५॥
दिशो विचेतुं तां सीतां त्वद्वियोगेन शोचतीम्।
अन्वेष्यति वरारोहां मैथिलीं रावणालये॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राघव! वह तुम्हारे वियोग में विलाप करती हुई सीता को ढूँढ़ने के लिए सब दिशाओं में बड़े-बड़े वानरों को भेजेगा तथा रावण के घर से भी सुन्दर अंगों वाली मिथिला की राजकुमारी को खोज निकालेगा।।25-26।।
 
Raghava! He will send huge monkeys in all directions to look for Sita who is mourning your separation, and will also find the princess of Mithila with beautiful body parts even from Ravana's house. 25-26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)