Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.72.19: वह अपनी इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ है, शक्तिशाली और कृतज्ञ है तथा इस समय स्वयं किसी सहायक की खोज में है। तुम दोनों भाई उसका अभीष्ट कार्य सिद्ध करने में समर्थ हो।॥19॥ | ramayan सर्ग 3.72: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा चिता की आग में कबन्ध का दाह तथा उसका दिव्य रूप में प्रकट होकर उन्हें सग्रीव से मित्रता करने के लिये कहना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृतज्ञ: कामरूपी च सहायार्थी च वीर्यवान्।
शक्तौ ह्यद्य युवां कर्तुं कार्यं तस्य चिकीर्षितम्॥ १९॥
अनुवाद
वह अपनी इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ है, शक्तिशाली और कृतज्ञ है तथा इस समय स्वयं किसी सहायक की खोज में है। तुम दोनों भाई उसका अभीष्ट कार्य सिद्ध करने में समर्थ हो।॥19॥
‘He is capable of assuming any form as per his wish, is powerful and grateful and at present he is himself looking for a helper. You two brothers are capable of accomplishing his desired task.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥