श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 72: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा चिता की आग में कबन्ध का दाह तथा उसका दिव्य रूप में प्रकट होकर उन्हें सग्रीव से मित्रता करने के लिये कहना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.72.14-15 
भ्रात्रा विवासितो वीर राज्यहेतोर्महात्मना॥ १४॥
स ते सहायो मित्रं च सीताया: परिमार्गणे।
भविष्यति हि ते राम मा च शोके मन: कृथा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वालि श्री राम! उनके महान भाई वालि ने उन्हें राज्य से निकाल कर सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार कर लिया है; अतः सीता की खोज में वे आपके सहायक और मित्र होंगे। अतः आप अपने मन को दुःखी न होने दें॥ 14-15॥
 
Vali Shri Ram! His great brother Vali has thrown him out of the kingdom to take over the entire kingdom; hence he will be your helper and friend in the search for Sita. Therefore, do not let your mind be sad.॥ 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)