श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 72: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा चिता की आग में कबन्ध का दाह तथा उसका दिव्य रूप में प्रकट होकर उन्हें सग्रीव से मित्रता करने के लिये कहना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.72.12 
ऋष्यमूके गिरिवरे पम्पापर्यन्तशोभिते।
निवसत्यात्मवान् वीरश्चतुर्भि: सह वानरै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे वीर और बुद्धिमान सुग्रीव इस समय चार वानरों के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर निवास करते हैं, जो पंपासरोवर तक फैला हुआ है॥ 12॥
 
That brave and intelligent Sugreeva at this time resides with four monkeys on the Rishyamuka mountain that extends up to the Pampasarovar.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)