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ramayan 3.71.19-20h: हे पुरुषोत्तम! जब तुम दोनों अग्नि द्वारा मेरा दाह करोगे, तब मैं तुम्हारी बुद्धि की सहायता करूँगा। मैं तुम दोनों को एक अच्छे मित्र का पता बताऊँगा।॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  3.71.19-20h 
अहं हि मतिसाचिव्यं करिष्यामि नरर्षभ॥ १९॥
मित्रं चैवोपदेक्ष्यामि युवाभ्यां संस्कृतोऽग्निना।
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! जब तुम दोनों अग्नि द्वारा मेरा दाह करोगे, तब मैं तुम्हारी बुद्धि की सहायता करूँगा। मैं तुम दोनों को एक अच्छे मित्र का पता बताऊँगा।॥19 1/2॥
 
‘Best of men! When you both cremate me through fire, I will help you intellectually. I will tell you both the address of a good friend.’॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)