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ramayan 3.71.11-12h: मैंने बहुत प्रार्थना की, तो उन्होंने मुझे यमलोक नहीं भेजा और कहा - 'पितामह ब्रह्माजी ने तुम्हें दीर्घायु का जो वरदान दिया है, वह सत्य हो।' ॥11 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  3.71.11-12h 
स मया याच्यमान: सन् नानयद् यमसादनम्॥ ११॥
पितामहवच: सत्यं तदस्त्विति ममाब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
मैंने बहुत प्रार्थना की, तो उन्होंने मुझे यमलोक नहीं भेजा और कहा - 'पितामह ब्रह्माजी ने तुम्हें दीर्घायु का जो वरदान दिया है, वह सत्य हो।' ॥11 1/2॥
 
I prayed a lot, so he did not send me to Yamaloka and said - 'May the boon given to you by Grandfather Brahmaji for long life come true.' ॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)