Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.71.10-11h: ऐसा विचार करके एक दिन मैंने युद्ध में देवताओं के राजा पर आक्रमण किया। उस समय इन्द्र ने मुझ पर सौ धार वाले वज्र से आक्रमण किया। उनके द्वारा छोड़ा गया वह वज्र मेरी जाँघों और सिर को छेदकर मेरे ही शरीर में जा लगा॥ 10 1/2॥ | ramayan सर्ग 3.71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा विचार करके एक दिन मैंने युद्ध में देवताओं के राजा पर आक्रमण किया। उस समय इन्द्र ने मुझ पर सौ धार वाले वज्र से आक्रमण किया। उनके द्वारा छोड़ा गया वह वज्र मेरी जाँघों और सिर को छेदकर मेरे ही शरीर में जा लगा॥ 10 1/2॥
With such thoughts in mind, one day I attacked the king of gods in battle. At that time Indra attacked me with a thunderbolt having a hundred edges. The thunderbolt released by him pierced my thighs and head into my own body.॥ 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥