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ramayan 3.71.1: महाबाहु श्री राम! प्राचीन काल में मेरा स्वरूप महान पराक्रम से युक्त, अचिन्त्य और तीनों लोकों में प्रसिद्ध था। 1॥   |   ramayan सर्ग 3.71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 71: कबन्ध की आत्मकथा, अपने शरीर का दाह हो जाने पर उसका श्रीराम को सीता के अन्वेषण में सहायता देने का आश्वासन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.71.1 
पुरा राम महाबाहो महाबलपराक्रमम्।
रूपमासीन्ममाचिन्त्यं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु श्री राम! प्राचीन काल में मेरा स्वरूप महान पराक्रम से युक्त, अचिन्त्य और तीनों लोकों में प्रसिद्ध था। 1॥
 
‘Mahabahu Shri Ram! In ancient times, my form was full of great might, inconceivable and famous in all the three worlds. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)