श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 70: श्रीराम और लक्ष्मण का परस्पर विचार करके कबन्ध की दोनों भुजाओं को काट डालना तथा कबन्ध के द्वारा उनका स्वागत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.70.10 
स पपात महाबाहुश्छिन्नबाहुर्महास्वन:।
खं च गां च दिशश्चैव नादयञ्जलदो यथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भुजाएँ कट जाने पर वह महाबाहु राक्षस मेघ के समान जोर से गर्जना करता हुआ पृथ्वी पर गिर पड़ा और आकाश तथा सम्पूर्ण दिशाओं में गूँजने लगा॥10॥
 
After his arms were chopped off, the mighty-armed demon roared loudly like a cloud and fell on the earth, echoing in the sky and all directions.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)