श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.68.6 
कथं तच्चन्द्रसंकाशं मुखमासीन्मनोहरम्।
सीतया कानि चोक्तानि तस्मिन् काले द्विजोत्तम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ पक्षी! सीता का मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर कैसे हो गया था? और उस समय सीता ने क्या कहा था?॥6॥
 
O great bird! How had Sita's face become as beautiful as the moon? And what had Sita said at that time?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)