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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 3: अरण्य काण्ड
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सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार
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श्लोक 5
श्लोक
3.68.5
किंनिमित्तो जहारार्यां रावणस्तस्य किं मया।
अपराधं तु यं दृष्ट्वा रावणेन हृता प्रिया॥ ५॥
अनुवाद
वह कौन-सा अपराध है जिसके कारण रावण ने मेरी प्रिय पत्नी का हरण किया? और वह अपराध मैंने कब किया? रावण ने आर्या सीता का हरण किस कारण से किया?॥5॥
What is the crime due to which Ravana abducted my beloved wife? And when did I commit it? For what reason did Ravana abduct Arya Sita?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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