Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.68.14: 'इसलिए अब तुम जनकननदिनी के लिए शोक मत करो। युद्धभूमि के मुहाने पर उस राक्षस को मारकर तुम शीघ्र ही पुनः विदेह की राजकुमारी के साथ भोग करोगे।'॥14॥   |   ramayan सर्ग 3.68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 68: जटायु का प्राण-त्याग और श्रीराम द्वारा उनका दाह-संस्कार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.68.14 
न च त्वया व्यथा कार्या जनकस्य सुतां प्रति।
वैदेह्या रंस्यसे क्षिप्रं हत्वा तं रणमूर्धनि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'इसलिए अब तुम जनकननदिनी के लिए शोक मत करो। युद्धभूमि के मुहाने पर उस राक्षस को मारकर तुम शीघ्र ही पुनः विदेह की राजकुमारी के साथ भोग करोगे।'॥14॥
 
‘Therefore, now do not feel sorry for Janakanandini. After killing that demon at the mouth of the battle field, you will soon enjoy the company of the princess of Videha again.'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)