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ramayan 3.67.9-10: थोड़ा आगे जाने पर उन्होंने महान पक्षीराज जटायु को देखा, जिनका शरीर पर्वत शिखर के समान विशाल था, वे रक्त से लथपथ भूमि पर पड़े हुए थे। पर्वत शिखर के समान प्रतीत होने वाले उस गिद्धराज को देखकर श्री राम ने लक्ष्मण से कहा -॥9-10॥   |   ramayan सर्ग 3.67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.67.9-10 
तत: पर्वतकूटाभं महाभागं द्विजोत्तमम्॥ ९॥
ददर्श पतितं भूमौ क्षतजार्द्रं जटायुषम्।
तं दृष्ट्वा गिरिशृङ्गाभं रामो लक्ष्मणमब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
थोड़ा आगे जाने पर उन्होंने महान पक्षीराज जटायु को देखा, जिनका शरीर पर्वत शिखर के समान विशाल था, वे रक्त से लथपथ भूमि पर पड़े हुए थे। पर्वत शिखर के समान प्रतीत होने वाले उस गिद्धराज को देखकर श्री राम ने लक्ष्मण से कहा -॥9-10॥
 
After going a little further, they saw the great bird king Jatayu, whose body was as huge as a mountain peak, lying on the ground soaked in blood. Seeing that vulture king, who appeared like a mountain peak, Shri Ram said to Lakshmana -॥9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)