श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  3.67.8-9h 
इत्युक्तस्तद् वनं सर्वं विचचार सलक्ष्मण:॥ ८॥
क्रुद्धो राम: शरं घोरं संधाय धनुषि क्षुरम्।
 
 
अनुवाद
उसके ऐसा कहते ही श्री राम ने लक्ष्मण के साथ क्रोधपूर्वक अपने धनुष पर क्षुर नामक भयंकर बाण चढ़ाया और सम्पूर्ण वन में घूमने लगे।
 
On hearing him say this, Sri Rama along with Lakshmana angrily mounted a fierce arrow called Kshur on their bow and started roaming around the entire forest. 8 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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