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श्लोक 3.67.7-8h  |
तानि युक्तो मया सार्धं समन्वेषितुमर्हसि।
त्वद्विधा बुद्धिसम्पन्ना महात्मानो नरर्षभा:॥ ७॥
आपत्सु न प्रकम्पन्ते वायुवेगैरिवाचला:। |
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| अनुवाद |
| मेरे साथ आओ और उन सभी स्थानों में एकाग्रचित्त होकर सीता की खोज करो। जैसे पर्वत वायु के वेग से नहीं काँपते, वैसे ही तुम्हारे समान बुद्धिमान और महापुरुष विपत्तियों में विचलित नहीं होते।॥7 1/2॥ |
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| ‘Come with me and search for Sita in all those places with a focused mind. Just as mountains do not tremble with the force of wind, similarly a wise and great man like you does not get perturbed in adversities.’॥ 7 1/2॥ |
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