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श्लोक 3.67.27  |
अयं पितुर्वयस्यो मे गृध्रराजो महाबल:।
शेते विनिहतो भूमौ मम भाग्यविपर्ययात्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| यह महाबली गिद्धराज जटायु मेरे पिता का मित्र था, किन्तु आज मेरे दुर्भाग्य से वह मारा गया है और भूमि पर पड़ा है।॥27॥ |
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| This mighty vulture king Jatayu was my father's friend, but today, unfortunately for me, he has been killed and is lying on the ground.'॥ 27॥ |
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