श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.67.27 
अयं पितुर्वयस्यो मे गृध्रराजो महाबल:।
शेते विनिहतो भूमौ मम भाग्यविपर्ययात्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यह महाबली गिद्धराज जटायु मेरे पिता का मित्र था, किन्तु आज मेरे दुर्भाग्य से वह मारा गया है और भूमि पर पड़ा है।॥27॥
 
This mighty vulture king Jatayu was my father's friend, but today, unfortunately for me, he has been killed and is lying on the ground.'॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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