श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.67.25 
सम्पूर्णमपि चेदद्य प्रतरेयं महोदधिम्।
सोऽपि नूनं ममालक्ष्म्या विशुष्येत् सरितां पति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यदि आज मैं पूर्ण समुद्र में तैरने लगूँ, तो नदियों का स्वामी समुद्र मेरे दुर्भाग्य के ताप से अवश्य ही सूख जाएगा ॥ 25॥
 
If today I start swimming in the full ocean, then the sea, the lord of rivers, will surely dry up due to the heat of my misfortune. ॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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