Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 3.67.23: केवल ऊपर की ओर श्वास लेने और बार-बार गहरी श्वास लेने की कठिन स्थिति में असहाय जटायु को देखकर श्री राम को बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने सुमित्रापुत्र से कहा-॥23॥   |   ramayan सर्ग 3.67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.67.23 
एकमेकायने कृच्छ्रे नि:श्वसन्तं मुहुर्मुहु:।
समीक्ष्य दु:खितो राम: सौमित्रिमिदमब्रवीत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
केवल ऊपर की ओर श्वास लेने और बार-बार गहरी श्वास लेने की कठिन स्थिति में असहाय जटायु को देखकर श्री राम को बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने सुमित्रापुत्र से कहा-॥23॥
 
Looking at Jatayu who was helpless and in the difficult situation of only upward breathing and taking deep breaths repeatedly, Shri Ram felt very sad. He said to Sumitra's son -॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)