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श्लोक 3.67.18  |
एतदस्य धनुर्भग्नमेते चास्य शरास्तथा।
अयमस्य रणे राम भग्न: सांग्रामिको रथ:॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम! यह रहा उनका टूटा हुआ धनुष, ये रहे उनके टूटे हुए बाण और यह रहा उनका युद्ध रथ, जिसे मैंने युद्ध में नष्ट कर दिया है॥18॥ |
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| Shri Ram! Here is his broken bow, these are his broken arrows and this is his war chariot, which has been destroyed by me in the war.॥ 18॥ |
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