श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.67.18 
एतदस्य धनुर्भग्नमेते चास्य शरास्तथा।
अयमस्य रणे राम भग्न: सांग्रामिको रथ:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! यह रहा उनका टूटा हुआ धनुष, ये रहे उनके टूटे हुए बाण और यह रहा उनका युद्ध रथ, जिसे मैंने युद्ध में नष्ट कर दिया है॥18॥
 
Shri Ram! Here is his broken bow, these are his broken arrows and this is his war chariot, which has been destroyed by me in the war.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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