श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.67.16 
त्वया विरहिता देवी लक्ष्मणेन च राघव।
ह्रियमाणा मया दृष्टा रावणेन बलीयसा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! जब आप और लक्ष्मण वहाँ नहीं थे, तब महाबली रावण आया और देवी सीता का हरण करने लगा। उस समय मेरी दृष्टि सीता पर पड़ी॥16॥
 
Raghunandan! When you and Lakshman were not there, the mighty Ravana came and started kidnapping Goddess Sita. At that time my sight fell on Sita.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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