श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.67.14 
तं दीनदीनया वाचा सफेनं रुधिरं वमन्।
अभ्यभाषत पक्षी स रामं दशरथात्मजम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय जटायु पक्षी अपने मुख से फेनयुक्त रक्त उगलता हुआ अत्यन्त करुण वाणी में दशरथपुत्र श्री रामजी से बोला-॥14॥
 
At this time the bird Jatayu, vomiting foamy blood from his mouth, spoke to Sri Rama, son of Dasharatha in a very pitiable voice -॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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