vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना
»
श्लोक 13
श्लोक
3.67.13
इत्युक्त्वाभ्यपतद् द्रष्टुं संधाय धनुषि क्षुरम्।
क्रुद्धो राम: समुद्रान्तां चालयन्निव मेदिनीम्॥ १३॥
अनुवाद
ऐसा कहकर श्री रामजी क्रोध में भरकर धनुष पर बाण चढ़ाकर पृथ्वी को समुद्र तक हिलाते हुए उसे देखने के लिए आगे बढ़े॥13॥
Having said this, Sri Rama, filled with anger, strung an arrow to his bow and proceeded to see him, shaking the earth up to the sea.॥ 13॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas