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ramayan 3.67.13: ऐसा कहकर श्री रामजी क्रोध में भरकर धनुष पर बाण चढ़ाकर पृथ्वी को समुद्र तक हिलाते हुए उसे देखने के लिए आगे बढ़े॥13॥   |   ramayan सर्ग 3.67: श्रीराम और लक्ष्मण की पक्षिराज जटायु से भेंट तथा श्रीराम का उन्हें गले से लगाकर रोना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.67.13 
इत्युक्त्वाभ्यपतद् द्रष्टुं संधाय धनुषि क्षुरम्।
क्रुद्धो राम: समुद्रान्तां चालयन्निव मेदिनीम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर श्री रामजी क्रोध में भरकर धनुष पर बाण चढ़ाकर पृथ्वी को समुद्र तक हिलाते हुए उसे देखने के लिए आगे बढ़े॥13॥
 
Having said this, Sri Rama, filled with anger, strung an arrow to his bow and proceeded to see him, shaking the earth up to the sea.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)