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दु:खितो हि भवाँल्लोकांस्तेजसा यदि धक्ष्यते।
आर्ता: प्रजा नरव्याघ्र क्व नु यास्यन्ति निर्वृतिम्॥ ७॥
अनुवाद
हे नरसिंह! यदि आप दुःखी हो जाएँ और अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को जला डालें, तो दुःखी मनुष्य किसकी शरण में सुख और शान्ति पाएंगे?
O lion of men! If you become sad and burn all the worlds with your brilliance, then in whose refuge will the distressed people find happiness and peace? 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥