Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.66.5: 'ककुत्स्थकुलभूषण! यदि आप स्वयं अपने ऊपर आए हुए दुःख को धैर्यपूर्वक सहन नहीं करते, तो फिर कौन सा अन्य साधारण मनुष्य, जिसका बल अत्यन्त अल्प है, उसे सहन कर सकेगा?॥5॥ | ramayan सर्ग 3.66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि दु:खमिदं प्राप्तं काकुत्स्थ न सहिष्यसे।
प्राकृतश्चाल्पसत्त्वश्च इतर: क: सहिष्यति॥ ५॥
अनुवाद
'ककुत्स्थकुलभूषण! यदि आप स्वयं अपने ऊपर आए हुए दुःख को धैर्यपूर्वक सहन नहीं करते, तो फिर कौन सा अन्य साधारण मनुष्य, जिसका बल अत्यन्त अल्प है, उसे सहन कर सकेगा?॥5॥
'Kakutsthakulbhushan! If you yourself do not patiently bear the misery that has fallen on you, then which other ordinary man, whose strength is very little, will be able to bear it?॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥