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ramayan 3.66.17: जिनके गुण-दोष देखे या जाने नहीं जा सकते तथा जो अपरिवर्तनीय हैं और अपना फल देकर नष्ट हो जाने वाले हैं, ऐसे कर्मों का अच्छा या बुरा फल तब तक प्राप्त नहीं होता जब तक मनुष्य उन्हें आचरण में न लाए ॥17॥   |   ramayan सर्ग 3.66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.66.17 
अदृष्टगुणदोषाणामध्रुवाणां तु कर्मणाम्।
नान्तरेण क्रियां तेषां फलमिष्टं च वर्तते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिनके गुण-दोष देखे या जाने नहीं जा सकते तथा जो अपरिवर्तनीय हैं और अपना फल देकर नष्ट हो जाने वाले हैं, ऐसे कर्मों का अच्छा या बुरा फल तब तक प्राप्त नहीं होता जब तक मनुष्य उन्हें आचरण में न लाए ॥17॥
 
The good or bad results of such deeds whose qualities and defects cannot be seen or known and which are immutable and will be destroyed after giving their results cannot be achieved unless one puts them into practice.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)