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ramayan 3.66.16: हे पुरुषश्रेष्ठ! तुम अपनी बुद्धि से सत्य को विचार करो - क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए; क्या उचित है और क्या अनुचित - इसका निश्चय करो; क्योंकि बुद्धि से युक्त बुद्धिमान पुरुष ही अच्छे और बुरे (कर्तव्य और अकर्तव्य तथा उचित और अनुचित) को अच्छी तरह जानता है।॥ 16॥   |   ramayan सर्ग 3.66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.66.16 
तत्त्वतो हि नरश्रेष्ठ बुद्धॺा समनुचिन्तय।
बुद्धॺा युक्ता महाप्राज्ञा विजानन्ति शुभाशुभे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! तुम अपनी बुद्धि से सत्य को विचार करो - क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए; क्या उचित है और क्या अनुचित - इसका निश्चय करो; क्योंकि बुद्धि से युक्त बुद्धिमान पुरुष ही अच्छे और बुरे (कर्तव्य और अकर्तव्य तथा उचित और अनुचित) को अच्छी तरह जानता है।॥ 16॥
 
‘O best of men! You should think through the truth with your intellect – what should be done and what should not be done; what is right and what is wrong – decide this; because only a wise person endowed with wisdom knows well what is good and what is bad (duty and non-duty and right and wrong).॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)