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सुमहान्त्यपि भूतानि देवाश्च पुरुषर्षभ।
न दैवस्य प्रमुञ्चन्ति सर्वभूतानि देहिन:॥ १२॥
अनुवाद
हे श्रेष्ठ पुरुषों! बड़े-बड़े भूत-प्रेत और देवता भी प्रारब्ध कर्म से मुक्त नहीं हो सकते; फिर समस्त प्राणियों के विषय में क्या कहा जा सकता है?॥12॥
O great men! Even great ghosts and gods cannot be free from the control of destiny (prarabdha-karma); then what can be said about all living beings?॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥