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ramayan 3.66.12: हे श्रेष्ठ पुरुषों! बड़े-बड़े भूत-प्रेत और देवता भी प्रारब्ध कर्म से मुक्त नहीं हो सकते; फिर समस्त प्राणियों के विषय में क्या कहा जा सकता है?॥12॥   |   ramayan सर्ग 3.66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.66.12 
सुमहान्त्यपि भूतानि देवाश्च पुरुषर्षभ।
न दैवस्य प्रमुञ्चन्ति सर्वभूतानि देहिन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ पुरुषों! बड़े-बड़े भूत-प्रेत और देवता भी प्रारब्ध कर्म से मुक्त नहीं हो सकते; फिर समस्त प्राणियों के विषय में क्या कहा जा सकता है?॥12॥
 
O great men! Even great ghosts and gods cannot be free from the control of destiny (prarabdha-karma); then what can be said about all living beings?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)