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ramayan 3.66.11: जो धर्म के प्रवर्तक और जगत के नेत्र हैं, जिन पर समस्त जगत स्थित है, वे महाबली सूर्य और चन्द्रमा भी राहु द्वारा ग्रहण किये हुए हैं॥11॥   |   ramayan सर्ग 3.66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 66: लक्ष्मण का श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.66.11 
यौ धर्मौ जगतो नेत्रौ यत्र सर्वं प्रतिष्ठितम्।
आदित्यचन्द्रौ ग्रहणमभ्युपेतौ महाबलौ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो धर्म के प्रवर्तक और जगत के नेत्र हैं, जिन पर समस्त जगत स्थित है, वे महाबली सूर्य और चन्द्रमा भी राहु द्वारा ग्रहण किये हुए हैं॥11॥
 
The one who is the promoter of religion and the eye of the world, on whom the whole universe rests, even those mighty Sun and Moon are eclipsed by Rahu.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)