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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  3.64.62-63h 
न ते कुशलिनीं सीतां प्रदास्यन्ति ममेश्वरा:॥ ६२॥
अस्मिन् मुहूर्ते सौमित्रे मम द्रक्ष्यन्ति विक्रमम्।
 
 
अनुवाद
'सुमित्रानन्दन! यदि इस समय में देवतागण मुझे सकुशल सीतादेवी के पास न लौटा दें, तो वे मेरी वीरता देखेंगे। 62 1/2॥
 
'Sumitranandan! If the Gods do not return me to Sita Devi safely in this time, then they will see my bravery. 62 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)