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ramayan 3.64.54: हे लक्ष्मण! जो महेश्वर 'त्रिपुर विजय' के समान पराक्रम से युक्त हैं और जो सम्पूर्ण लोकों की रचना, पालन और संहार करते हैं, वे जब दयालु स्वभाव के कारण मौन रहते हैं, तब समस्त प्राणी उनके ऐश्वर्य को न जानकर उनका तिरस्कार करने लगते हैं॥ 54॥   |   ramayan सर्ग 3.64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.64.54 
कर्तारमपि लोकानां शूरं करुणवेदिनम्।
अज्ञानादवमन्येरन् सर्वभूतानि लक्ष्मण॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे लक्ष्मण! जो महेश्वर 'त्रिपुर विजय' के समान पराक्रम से युक्त हैं और जो सम्पूर्ण लोकों की रचना, पालन और संहार करते हैं, वे जब दयालु स्वभाव के कारण मौन रहते हैं, तब समस्त प्राणी उनके ऐश्वर्य को न जानकर उनका तिरस्कार करने लगते हैं॥ 54॥
 
Lakshmana! When the Maheshwara who is endowed with valour like 'Tripura Vijaya' and who creates, nurtures and destroys all the worlds, remains silent due to his compassionate nature, then all beings, not knowing about his opulence, start despising him.॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)