Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 3.64.50-51: सौम्य! यह तो किसी राक्षस के पदचिह्न जैसा प्रतीत होता है। इन अत्यंत क्रूर हृदय वाले कामातुर राक्षसों के साथ मेरा वैर सौ गुना बढ़ गया है। देखो, इनके प्राण लेने से ही यह वैर शांत होगा ॥50-51॥ | ramayan सर्ग 3.64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना । ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौम्य! यह तो किसी राक्षस के पदचिह्न जैसा प्रतीत होता है। इन अत्यंत क्रूर हृदय वाले कामातुर राक्षसों के साथ मेरा वैर सौ गुना बढ़ गया है। देखो, इनके प्राण लेने से ही यह वैर शांत होगा ॥50-51॥
'Soumya! This certainly looks like the footprint of some demon. My enmity with these extremely cruel-hearted lustful demons has increased a hundredfold. Look, this enmity will be appeased only by taking their lives. ॥ 50-51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥