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इमां वा सरितं चाद्य शोषयिष्यामि लक्ष्मण॥ ३४॥
यदि नाख्याति मे सीतामद्य चन्द्रनिभाननाम्।
अनुवाद
(इसके बाद उन्होंने सुमित्राकुमार से कहा-) 'लक्ष्मण! यदि यह नदी आज मुझे चन्द्रमुखी सीता का पता न बताए, तो मैं इसे भी सुखा दूँगा।'
(After this he said to Sumitrakumar -) 'Lakshmana! If this river does not tell me the whereabouts of Chandramukhi Sita today, then I will dry it up as well.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥