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ramayan 3.64.27-28h: "मैं मानता हूँ कि सूर्य, वायु और महिमामयी पृथ्वी ने मुझे प्रसन्न करने के लिए ही इन फूलों को सुरक्षित रखा है।" ॥27 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  3.64.27-28h 
मन्ये सूर्यश्च वायुश्च मेदिनी च यशस्विनी॥ २७॥
अभिरक्षन्ति पुष्पाणि प्रकुर्वन्तो मम प्रियम्।
 
 
अनुवाद
"मैं मानता हूँ कि सूर्य, वायु और महिमामयी पृथ्वी ने मुझे प्रसन्न करने के लिए ही इन फूलों को सुरक्षित रखा है।" ॥27 1/2॥
 
"I believe that the Sun, the Wind and the glorious Earth have preserved these flowers just to please me." ॥27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)