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ramayan 3.64.25-26h: पृथ्वी पर पुष्पों की उस वर्षा को देखकर वीर श्री रामजी दुःखी हो गए और लक्ष्मण से ये दुःख भरे वचन बोले- ॥25 1/2॥   |   ramayan सर्ग 3.64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम और लक्ष्मण के द्वारा सीता की खोज, आभूषणों के कण और युद्ध के चिह्न देखकर श्रीराम का देवता आदि सहित समस्त त्रिलोकी पर रोष प्रकट करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  3.64.25-26h 
पुष्पवृष्टिं निपतितां दृष्ट्वा रामो महीतले॥ २५॥
उवाच लक्ष्मणं वीरो दु:खितो दु:खितं वच:।
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर पुष्पों की उस वर्षा को देखकर वीर श्री रामजी दुःखी हो गए और लक्ष्मण से ये दुःख भरे वचन बोले- ॥25 1/2॥
 
Seeing that rain of flowers on the earth, the brave Sri Rama became sad and said these sorrowful words to Lakshmana - ॥25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)