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निराशस्तु तया नद्या सीताया दर्शने कृत:।
उवाच राम: सौमित्रिं सीतादर्शनकर्शित:॥ १०॥
अनुवाद
जब नदी ने सीता के दर्शन के विषय में उन्हें पूर्णतः निराश कर दिया, तब सीता के दर्शन न कर पाने के कारण दुःखी हुए श्री रामजी सुमित्रापुत्र से इस प्रकार बोले-॥10॥
When the river completely disappointed him regarding the sight of Sita, then Sri Rama, who was in pain due to not being able to see Sita, spoke to Sumitra's son in this manner -॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥