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श्लोक  3.62.4 
कदलीकाण्डसदृशौ कदल्या संवृतावुभौ।
ऊरू पश्यामि ते देवि नासि शक्ता निगूहितुम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'देवी! मैं आपकी उन जाँघों को देख रहा हूँ जो केले के तने के समान लम्बी हैं और केले के पत्तों के पीछे छिपी हुई हैं। आप उन्हें छिपा नहीं सकतीं॥ 4॥
 
‘Devi! I am looking at your thighs which are as long as the banana stems and hidden behind the banana leaves. You cannot hide them.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)