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श्लोक  3.61.20-21 
तौ वनानि गिरींश्चैव सरितश्च सरांसि च।
निखिलेन विचिन्वन्तौ सीतां दशरथात्मजौ॥ २०॥
तस्य शैलस्य सानूनि शिलाश्च शिखराणि च।
निखिलेन विचिन्वन्तौ नैव तामभिजग्मतु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
दशरथ के दोनों पुत्र वनों में, पर्वतों में, नदियों और सरोवरों के किनारे घूम-घूमकर सीता को खोजते रहे। उन्होंने उस पर्वत की चोटियों, शिलाओं और शिखरों पर जानकी को खूब खोजा; परन्तु वे कहीं न मिलीं।
 
Both the sons of Dasaratha kept searching for Sita by roaming around in the forests, mountains, along the banks of rivers and lakes. They searched for Janaki thoroughly on the peaks, rocks and peaks of that mountain; but they could not find her anywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)