श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.60.29 
नैव सा नूनमथवा हिंसिता चारुहासिनी।
कृच्छ्रं प्राप्तं न मां नूनं यथोपेक्षितुमर्हति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
(फिर जब उनका भ्रम दूर हो गया तो उन्होंने कहा -) 'या फिर वह तो नहीं है। उस मनोहर मुस्कान वाली सीता को राक्षसों ने मार डाला, अन्यथा जब मैं ऐसे संकट में था, तब वह मेरी उपेक्षा कभी न करती।'
 
(Then after his confusion was cleared he said -) 'Or it is definitely not her. That charming smiling Sita was killed by the demons, otherwise she would never have ignored me when I was in such a trouble.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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