श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.60.27 
तिष्ठ तिष्ठ वरारोहे न तेऽस्ति करुणा मयि।
नात्यर्थं हास्यशीलासि किमर्थं मामुपेक्षसे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'वरारोहे! ठहरो, ठहरो। क्या तुम्हें मुझ पर दया नहीं आती? अधिक परिहास करना तुम्हारा स्वभाव नहीं था, फिर तुम मेरी उपेक्षा क्यों करते हो?॥27॥
 
‘Vararohe! Wait, wait. Don't you feel pity for me? It was not your nature to joke too much, then why do you ignore me?॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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