श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.60.26 
किं धावसि प्रिये नूनं दृष्टासि कमलेक्षणे।
वृक्षैराच्छाद्य चात्मानं किं मां न प्रतिभाषसे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
(इस समय उसे भ्रम हुआ कि सीता दौड़कर वहाँ छिप गई है, तब उसने कहा-) 'प्रिये! तुम क्यों भाग रही हो? कमलोचने! मैंने तुम्हें अवश्य देखा है। तुम वृक्षों के पीछे छिपकर मुझसे क्यों नहीं बात करतीं?॥ 26॥
 
(At this moment he had the illusion that Sita was running and hiding there, then he said-) 'Dear! Why are you running away. Kamalochane! I have surely seen you. Why don't you hide yourself behind the trees and talk to me?॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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