श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.60.25 
शार्दूल यदि सा दृष्टा प्रिया चन्द्रनिभानना।
मैथिली मम विस्रब्ध: कथयस्व न ते भयम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
"बाघ! यदि तूने मेरी प्रिय चन्द्रमुखी मैथिली को देखा हो, तो निःसंदेह मुझे बता। तुझे मुझसे कोई भय नहीं रहेगा।" ॥25॥
 
"Tiger! If you have seen my beloved moon-faced Maithili, then tell me without any doubt. You will not have any fear from me." ॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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