श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.60.24 
गज सा गजनासोरुर्यदि दृष्टा त्वया भवेत्।
तां मन्ये विदितां तुभ्यमाख्याहि वरवारण॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे महाभाग्यराज! आपने सीता को देखा होगा, जिनकी दोनों जाँघें आपकी सूँड़ के समान हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आप उनका पता जानते हैं, अतः मुझे बताइए कि वह कहाँ हैं?॥ 24॥
 
'Great elephant king! You may have seen Sita who has both thighs like your trunk. It seems you know her address, so tell me where is she?॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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