श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.60.23 
अथवा मृगशावाक्षीं मृग जानासि मैथिलीम्।
मृगविप्रेक्षणी कान्ता मृगीभि: सहिता भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हिरणी को सामने देखकर उसने कहा, "हिरन! या तुम ही बताओ! क्या तुम उस हिरणी जैसी आँखों वाली मैथिली को जानते हो? मेरी प्रियतमा की दृष्टि भी तुम हिरणी जैसी है, इसलिए सम्भव है कि वह हिरणी के साथ हो।"
 
Seeing the deer in front of him, he said, 'Deer! Or you tell me! Do you know Maithili, the doe-eyed one? My beloved's gaze is also like that of you deer, so it is possible that she is with the deer.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas