| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना » श्लोक 21-22 |
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| | | | श्लोक 3.60.21-22  | चूतनीपमहासालान् पनसान् कुरवान् धवान्।
दाडिमानपि तान् गत्वा दृष्ट्वा रामो महायशा:॥ २१॥
बकुलानथ पुन्नागांश्चन्दनान् केतकांस्तथा।
पृच्छन् रामो वने भ्रान्त उन्मत्त इव लक्ष्यते॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | इसी प्रकार आम, कदम्ब, विशाल शाल, कटहल, कुरव, धव और अनार आदि वृक्षों को देखकर महाबली श्री रामचंद्रजी उनके पास गए और वकुल, पुन्नाग, चंदन और केवड़े आदि वृक्षों के विषय में भी पूछा। उस समय वे उन्मत्त की भाँति वन में इधर-उधर घूमते हुए दिखाई दिए॥21-22॥ | | | | Similarly, after seeing the trees like Mango, Kadamba, Vishal Shaal, Jackfruit, Kurav, Dhav and Pomegranate etc., the great Shri Ramchandraji went to them and also asked about the trees like Vakul, Punnag, Chandan and Kevade etc. At that time he was seen wandering here and there in the forest like a madman. 21-22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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