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श्लोक 3.60.20  |
अहो त्वं कर्णिकाराद्य पुष्पित: शोभसे भृशम्।
कर्णिकारप्रियां साध्वीं शंस दृष्टा यदि प्रिया॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| 'ओलियंडर! आज तुम फूलों के कारण बहुत सुन्दर लग रही हो। अरे! मेरी प्रिय साध्वी सीता को तुम्हारे ये फूल बहुत पसंद आए। अगर तुमने उन्हें कहीं देखा हो तो मुझे बताओ।'॥20॥ |
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| ‘Oleander! Today you are looking very beautiful because of the flowers. Oh! My dear Sadhvi Sita liked these flowers of yours very much. If you have seen her somewhere then tell me.’॥ 20॥ |
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