श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 60: श्रीराम का विलाप करते हुए वृक्षों और पशुओं से सीता का पता पूछना, भ्रान्त होकर रोना और बारंबार उनकी खोज करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.60.2 
उपालक्ष्य निमित्तानि सोऽशुभानि मुहुर्मुहु:।
अपि क्षेमं तु सीताया इति वै व्याजहार ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे बार-बार इन अपशकुनों को देखकर कहने लगे- क्या सीता सुरक्षित रहेंगी?॥2॥
 
Seeing these bad omens again and again he started saying- Will Sita be safe?॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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